Raktanchal Review :मिर्जापुर और गैग्‍स ऑफ वासेपुर की बिरयानी है

Raktanchal Review: mxplayer की रक्‍तांचल दो गुटो के वर्चस्‍व की कहानी है

mxplayer की वेब सीरिज रक्‍तांचल स्‍ट्रीम हो चुकी है । ऐसा लग रहा है जैसे सभी वेब सीरिज में एक जैसे कॉसेप्‍ट का चलन बन चुका है । कहानी में ढेर सारी गाली खुन खराबा और सेक्‍स के सीन दिखा कर फिल्‍मों और सीरिज को हिट करने की कोशिश की जा रही है । यही सब कुछ दिखाई देता है mxplayer की रक्‍तांचल वेब सीरिज में । जिसमें खुन , गालियो और लाशो के ढेर की कमी नहीं है । डायरेक्‍टर रितम श्रीवास्‍तव ने रक्‍तांचल में पूर्वाचल के 80 के दशक को दिखाया है जहां दो गुट आपस में अपने वर्चस्‍व को स्‍थापित करने की लड़ाई में खुन की होली खेल रहे है ।
Raktanchal web series Review
Raktanchal Review

कहानी

गाजीपुर बाहुबली वसीम खान पूर्वांचल में अपने राजनितिक समर्थन के कारण कई सारे गेरकानूनी धंधे करता है जिन्‍हे 80 के दशक में ठेके के नाम से जाना जाता है । जैसे शराब का ठेका ,कोयले का ठेका और कट्टे का ठेका । वसीम खान का पूर्वांचल में दबदबा पूरी तरह से जमा हुआ है । वही जब भी ऐसे लोग धरती पर होते है तो उनका विरोध करने वाला भी होता है । ठेकेदारी के खिलाफ आवाज उठाने गाजीपुर के नेता आते है जिन्‍हे वसीम के आदमी मार डालते है । नेता का बेटा विकास सिंह अपने पिता के मौत की बदले की आग में जल रहा है और वसीम को मार कर पूर्वांचल में अपना वर्चस्‍व स्‍थापित करना चाहता है । इसी वर्चस्‍व को बनाऐ रखने के लिए दोनो और से लाशे गिरने का दौर शुरू हो जाता है । रक्‍तांचल की पूरी कहानी अपने वर्चस्‍व को स्‍थापित करने की है । वसीम पूर्वाचल में अपना दबदबा बनाये रखने के लिए किसी को भी मौत के घाट उतार सकता है ।

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 तो वहीं विकास सिंह वसीम से बदला लेने और अपना वर्चस्‍व के लिए वसीम के हर काम में टांग अड़ाता है । भयंकर गाली गलोच और खू न खराबे से भरी ये रक्‍तांचल काफी हद तक मिर्जापुर से मिलती जुलती प्रतीत होती है । मिर्जापुर और सेक्रेड गेम की तरह ही आजकल गाली गलोच , खुन खराबा और सेक्‍स के सीन दिखाकर फिल्‍म और वेब सीरिज को अच्‍छा दिखाने की कोशिश की जाती है । लेकिन इन्‍ही सब चीजों से काम नहीं चलता । कहानी में दम होने के साथ हर पहलू पर ध्‍यान देना जरूरी हो जाता है । रक्‍तांचल भी सिर्फ नकल के अलावा और ज्‍यादा कुछ नहीं लगती । लेकिन फिर भी काफी हद तक यह ध्‍यान खींचने में कामयाब हो ही जाती है । कहानी के हर ऐपिसोट में एक सस्‍पेंस दिखाकर बांधे रखने की कोशिश की जाती है । पूरी सीरिज में 9 ऐपिसोट है । पहले भी बताया जा चुका है कि रक्‍तांचल की कहानी एक सच्‍ची घटना से प्रेरित है । जो कि मुख्तार अंसारी और ब्रजेश सिंह के बीच हुई गैंगवार से काफी हद तक मिलता हुआ नजर आता है

क्‍या है देखने लायक और नहीं

रक्‍तांचल में रोमांच देख कर लगता है कि एक डायरेक्‍टर ने अपनी पूरी कोशिश की है । सीरिज में निकितिन धीर वसीम के और क्रांति प्रकाश झा विकास के किरदार में है दोनो ही ने ठीक ठाक काम किया है । वसीम के किरदार में निकितिन चैन्‍नई एक्‍प्रेस के थंगाबली ही लगते है । जिनके चहरे पर सिर्फ एक ही भाव दिखाई देता है । कहानी और भाषा गाजीपुर और जौनपुर के आस पास का माहोल बनाने में सफल हो जाती है । अगर आप मिर्जापुर , गैग्‍स ऑफ वासेपुर और रंगबाज जैसी कहानी देख रहे है तो यह इन सबका मिलाजुला काम्‍बीनेशन है या युं कहे कि बिरयानी है । वैसे अगर आप क्राइम थ्रिलर और सस्‍पेंस के शोकिन है तो एक बार इसे जरूर देख सकते है ।

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